जगन प्रसाद गर्ग पांचवी बार विधायक बने. पार्टी ने मंत्री बनाना उचित नहीं समझा. शायद मंत्रिमंडल विस्तार में जगह मिले.

‘अग्रवाल टुडे’ ने पिछले अंक में विधायक जगन प्रसाद गर्ग को न केवल जीतने बल्कि मंत्री बनने की भविष्यवाणी की थी. विधायक तो बने मगर मंत्री बनने में अभी देर है. आगरा नार्थ की जनता को उम्मीद है की अगले विस्तार में उन्हें मंत्री बनाया जायेगा.
ऐसे विधायक बहुत कम हैं जिन्हें जनता के हर वर्ग का समर्थन है.

क्या वैश्यों ने आगरा नार्थ में चुनाव से बेरुखी दिखाई है ?

क्या वैश्यों ने आगरा नार्थ में चुनाव से बेरुखी दिखाई है ?
प्रथम चरण के चुनाव में आगरा नार्थ जो वैश्य बाहुल्य क्षेत्र है में सबसे काम वोटिंग परसेंटेज रही है. यह ठीक नहीं है. जितना और हारना तो कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है और यह जरूरी नहीं की जो जीते उसे सारी जनता का विश्वास प्राप्त है.
आगरा नार्थ में अगर वैश्यों ने बेरुखी दिखाई है तो परिस्थियों का विश्लेषण करना होगा. वर्ना यहाँ वैश्य निर्णायक नहीं रह पाएंगे.

क्या मानेंगे आप अग्रवालों को? क्षत्रिय या बनिये?

क्या मानेंगे आप अग्रवालों को? क्षत्रिय या बनिए?
अग्रवाल महाराजा अग्रसेन के वंशज हैं. महाराजा अग्रसेन ने वणिक धर्म ग्रहण कर लिया था. मगर धर्म ग्रहण करने से खून की क्वालिटी नहीं बदल सकती.वणिक धर्म ग्रहण करने का उद्देश्य हिंसा नहीं करना था.
आइये इस विषय में और बातचीत करें. थोड़ा थोड़ा सभी अपने विचार व्यक्त करें.
Dr. G.P.Agarwal, Chief Editor, ‘Agarwal Today’ monthly. 9412263311 (whatsapp), editor@agarwaltoday.com

Things to know about ‘Agarwal Today’

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‘अग्रवाल टुडे’ के बारे में जानने योग्य बातें :
१- पिछले पंद्रह वर्ष से लगातार प्रकाशित हो रहा है.
२- पूरे भारतवर्ष और विदेशों में भी सदस्य हैं.
३- बिना डाक टिकेट चिपकाये पोस्ट करने के लिए लाइसेंस मिला हुआ है.
४-केवल अग्रवाल समाज से सम्बंधित समाचार प्रकाशित होते हैं.
५- समाज के बारे में खरी खरी कहने वाला एकमात्र सामाजिक समाचार पत्र.
६- प्रति माह ११ व् १२ तारीख को डाक से भेज़ा जाता है.
७-वैवाहिक विज्ञापन निःशुल्क प्रकाशित किये जाते हैं.

और भी बहुत बातें बताने को हैं …………………

AGARWALS in the series of Anthropological Survey of India.

AGARWALS
Anthropological Survey of India published a series ‘People of India’. The Agarwals are the only community to feature in the volume on atleast five states showing how widespread their presence is.
The work on Uttar Pradesh (Volume 42, Part 1) says the Agarwals are “the highest and most important sub-division of Banias”. One branch of the community migrated to Rajasthan and are known as Marwaris. The other moved east and spread to Uttar Pradesh , Bihar and elsewhere.
The Anthropological Survey of India’s Volume 16, Part 1 (on Bihar) says the Agarwals “are placed lower than the Brahmans, the Kayasths and the Vaishyas”. It ends with the line that the Agarwals are “one of the most respectable and enterprising mercantile communities of the country”.
The Rajasthan volume (Volume 38, Part 1) says the Jain Agarwals were converted under a man named Lohacharya and that Agarwals “use Devnagari script for writing”.
Volume 23, which is on Haryana, conflates the Bania caste and the Agarwal community, claiming that “Banias are also called Agarwals and Gupta”. It spells the king’s name as Ugar Sain and says he had 17 sons. This volume says that a few Agarwals also follow Sikhism.
 

News of Agrasen Jayanti 2016

Readers are requested to send photos, news and other details of ‘Agrasen Jayanti’ celebrations from your city. Edited portions shall be published in ‘Agarwal Today’.
Names of senders shall accompany reports.
 

How to celebrate ‘Agrasen Jayanti’?

So how do you propose to celebrate ‘Agrasen Jayanti’? Best suggestion is going to get a gift from ‘Agarwal Today’ monthly newspaper. Names of senders of good suggestions shall be published in November issue of ‘Agarwal Today’

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क्या हम वाकई सोलह करोड़ हैं ?

जब हम कहते हैं कि विश्व  में  सोलह करोड़ अग्रवाल हैं तो लोगों को विश्वास नहीं होता। बड़ा आसान है। विभिन्न समय पर जन्म व मृत्यु दरों का हिसाब लगायें  और महाराजा अग्रसेन के समय के एक लाख अग्रवालों से शुरू करके आज उनकी संख्या की गणना की जाये तो यह संख्या सोलह करोड़ आती है। इसमें एक विरोध पैदा होता है कि यदि हम सब महाराजा अग्रसेन की संतान हैं तो उनसे ही शुरू किया जाये। गणना में यदि यह फर्क किया जाये तो भी संख्या वही आएगी क्योंकि सोलह करोड़ में एक लाख का फर्क कोई मायने नहीं रखता।

फिर क्या वजह है कि हमें सोलह करोड़ की संख्या पर शक होता है। इसकी वजह है सभी अग्रवाल अपने नाम के साथ अग्रवाल नहीं लिखते। काफी लोग तो अपना गोत्र लिखते हैं।  मगर बात इतने पर ही खत्म नहीं होती। इतने अधिक सरनेम लगाने लगे हैं अग्रवाल की अग्रवाल भी नहीं बता सकते की फलां सरनेम किसी अग्रवाल का है या नहीं। इसके अलावा कुछ लोग अपने निवास स्थान को सरनेम की तरह उपयोग करने लगे।